Wednesday, February 4, 2026

साल नया है


 जश्न चल रहा यहाँ वहाँ,लो आता साल नया है

सोच रहीअसमंजस में क्या,सच में कुछ बदला है 


फैले है दहशत के लम्हें ,  आँखो में खून भरा है 

अम्मा का संदूक  खुला है, प्यार मगर बदला है 


दुष्ट खड़ा है सीना ताने,, बेेटी डरी हुई है 

काले सिक्को की खन-खन से, सत्य न्याय बदला है 

 

 आर्त की चीखों से  धरती,हर दिन दहल रही  है 

तारीकी की चादर ओढ़े,  शहर मेरा बदला है 


 धुंध छंट रही हौले-हौले, ,भोर उजास खिली है 

फटी शर्ट-निकर में बच्चे, गाँव कहाँ बदला है 


तम को काट रहा है भानु,, प्राची में उतर रहा है

हाय गुम गई मानवताबस, कैलेंडर  बदला है

 

©नयना (आरती) कानिटकर


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